जब फुटबॉल ने करा दी दो देशों में जंग

 

1969 में फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर के दौरान अल साल्वाडोर और होंडुरास के बीच खेला गया फुटबॉल मैच इतिहास की सबसे चर्चित जंग का कारण बना। जानिए 100 घंटे के फुटबॉल वॉर की पूरी कहानी uplive24.com पर।

History of football war : बात जब फुटबॉल के लिए दीवानगी की हो, तो इसकी कोई हद नहीं। लेकिन यह जुनून कभी-कभी इतना खतरनाक भी हो सकता है कि देशों के रिश्ते तक टूट जाएं। इतिहास में एक ऐसी ही घटना दर्ज है, जब एक फुटबॉल मैच के बाद दो पड़ोसी देशों के बीच युद्ध छिड़ गया। यह संघर्ष 'फुटबॉल वॉर' या '100 घंटे की जंग' के नाम से जाना जाता है (History of football war)।

यह युद्ध जुलाई 1969 में मध्य अमेरिकी देशों अल साल्वाडोर (El Salvador) और होंडुरास (Honduras) के बीच हुआ था।

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क्या सचमुच फुटबॉल मैच की वजह से हुआ था युद्ध?

इतिहासकार मानते हैं कि युद्ध की असली वजह केवल फुटबॉल नहीं थी। दोनों देशों के बीच वर्षों से भूमि विवाद, आव्रजन और आर्थिक असमानता को लेकर तनाव चल रहा था। फुटबॉल मैच वह चिंगारी साबित हुआ जिसने पहले से सुलग रहे विवाद को खुली जंग में बदल दिया (History of football war)।

इस विवाद की जड़ें होंडुरास में भूमि सुधार और अल साल्वाडोर में आव्रजन और पलायन के मुद्दों में थीं। होंडुरास पड़ोसी देश अल साल्वाडोर से आकार में पांच गुना से अधिक है। 1969 में अल साल्वाडोर की आबादी 37 लाख और होंडुरास की आबादी 26 लाख थी। 

20वीं सदी की शुरुआत में साल्वाडोरवासी रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में होंडुरास की ओर पलायन करने लगे थे। 1969 तक होंडुरास में 3 लाख से अधिक साल्वाडोरवासी रह रहे थे। 

भूमि सुधार कानून से बढ़ा विवाद

होंडुरास सरकार ने 1962 में भूमि सुधार कानून बनाया, जिसे 1967 तक पूरी तरह लागू कर दिया गया। इस कानून के तहत अप्रवासियों द्वारा कब्जाई गई कई जमीनें वापस लेकर स्थानीय नागरिकों को दी जाने लगीं।

इस फैसले के बाद हजारों साल्वाडोरवासियों को अपनी जमीन छोड़नी पड़ी और बड़ी संख्या में लोगों को देश से बाहर निकाल दिया गया। इससे दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया (History of football war)।

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फीफा वर्ल्ड कप क्वॉलिफायर बना टर्निंग पॉइंट

इन हालात में जून 1969 में होंडुरास और अल साल्वाडोर के बीच 1970 फीफा वर्ल्ड कप क्वॉलीफायर के दो चरणों के मैच हुए। दोनों टीमों के एक-एक मैच जीतने के बाद प्लेऑफ मैच हुआ। इन्हीं मैचों ने जंग की इबारत लिख दी।

पहला मैच 8 जून को होंडुरास की राजधानी में खेला गया। होंडुरास ने यह मुकाबला 1-0 से जीत लिया। अल साल्वाडोर ने आरोप लगाया कि पूरी रात उसके खिलाड़ियों को होटल के बाहर शोर मचाकर सोने नहीं दिया गया (History of football war)।

इसी हार के बाद 18 वर्षीय युवती अमेलिया बोलानोस ने आत्महत्या कर ली। अल साल्वाडोर में उसे राष्ट्रीय शहीद जैसा सम्मान दिया गया और उसका अंतिम संस्कार सरकारी प्रसारण में दिखाया गया। इस घटना ने पूरे देश में भावनाओं को और भड़का दिया।

15 जून को दूसरा मुकाबला अल साल्वाडोर की राजधानी सैन साल्वाडोर में खेला गया। इस बार अल साल्वाडोर ने 3-0 से जीत हासिल की।

मैच शुरू होने से पहले ही स्टेडियम के बाहर हिंसा भड़क गई थी, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच होंडुरास की टीम मैदान तक पहुंच सकी (History of football war)।

मैच के बाद होंडुरास में रह रहे साल्वाडोरवासियों पर हमले शुरू हो गए। केवल तीन दिनों में लगभग 12 हजार लोग जान बचाकर अपने देश लौटने पर मजबूर हो गए।

27 जून 1969 को मेक्सिको सिटी में निर्णायक प्लेऑफ खेला गया। अतिरिक्त समय तक चले रोमांचक मुकाबले में अल साल्वाडोर ने 3-2 से जीत दर्ज कर 1970 फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई कर लिया (History of football war)।

हालांकि वर्ल्ड कप में उसका प्रदर्शन बेहद खराब रहा और वह अपने ग्रुप के सभी मैच हार गया। लेकिन इस जीत के बाद दोनों देशों के रिश्ते पूरी तरह टूट गए।

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100 घंटे की जंग कैसे शुरू हुई?

लगातार बढ़ते तनाव के बीच अल साल्वाडोर ने होंडुरास से राजनयिक संबंध समाप्त कर दिए। इसके कुछ समय बाद उसने हवाई हमला कर दिया। इसके जवाब में होंडुरास ने भी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी (History of football war)।

दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर आमने-सामने आ गईं। लड़ाई जमीन और आसमान दोनों जगह लड़ी गई। निकारागुआ के तत्कालीन शासक अनास्तासियो सोमोजा देबायले ने भी होंडुरास को हथियार और गोला-बारूद देकर सहायता की।

कैसे रुकी यह जंग?

स्थिति बिगड़ने पर ऑर्गनाइजेशन ऑफ अमेरिकन स्टेट्स (OAS) ने हस्तक्षेप किया। 18 जुलाई 1969 को आपात बैठक के बाद युद्धविराम कराया गया (History of football war)।

हालांकि अल साल्वाडोर ने अपनी सेना 2 अगस्त को वापस हटाई। इसके बदले होंडुरास ने वहां रह रहे साल्वाडोर के नागरिकों की सुरक्षा का आश्वासन दिया।

युद्ध की कीमत दोनों देशों ने चुकाई

यह युद्ध केवल चार दिन चला, लेकिन इसकी कीमत दोनों देशों को वर्षों तक चुकानी पड़ी।

करीब 30 हजार सैनिक इस संघर्ष में शामिल हुए। हजारों नागरिक और सैनिक मारे गए। अल साल्वाडोर में लगभग 900 नागरिकों की मौत हुई, जबकि होंडुरास ने करीब 250 सैनिक और 2,000 से अधिक नागरिक खो दिए।

लगभग तीन लाख साल्वाडोरवासियों को वापस अपने देश लौटना पड़ा। इससे वहां सामाजिक और आर्थिक संकट गहरा गया, जिसने आगे चलकर गृहयुद्ध का रूप ले लिया। अगले एक दशक में इस गृहयुद्ध में 75 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई (History of football war)।

युद्ध के बाद दोनों देशों की सीमा बंद कर दी गई। व्यापार पूरी तरह ठप हो गया। सेंट्रल अमेरिकन कॉमन मार्केट (CACM) भी करीब 22 वर्षों तक प्रभावित रहा। इससे पूरे मध्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा (History of football war)।

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11 साल बाद हुई शांति, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ

करीब 11 साल बाद, 30 अक्टूबर 1980 को दोनों देशों ने पेरू की राजधानी लीमा में शांति संधि पर हस्ताक्षर किए।

इसके बाद सीमा विवाद को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के माध्यम से सुलझाने पर सहमति बनी। अदालत ने 1992 में विवादित क्षेत्र का फैसला सुनाया, लेकिन मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए।

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